कालसर्प पूजा उज्जैन जुलाई 2026

उज्जैन में कालसर्प पूजा जुलाई 2026: जाने मुहूर्त, तिथि, विधि

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा कराने का विशेष महत्व है क्योंकि उज्जैन शिप्रा नदी के तट पर स्थित है, जिसे मोक्षदायिनी कहा जाता है। जुलाई 2026 उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा करने के लिए एक अत्यंत शुभ और फलदायी समय है। 13, 20, 27 जुलाई (श्रावण सोमवार) इस महीने के सर्वोत्तम पूजा मुहूर्त हैं। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की नगरी में की गई यह पूजा आपके जीवन से सभी बाधाओं को दूर कर सकती है।

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कालसर्प दोष क्या होता है और उज्जैन में पूजा क्यों की जाती है?

हिंदू ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प दोष एक ऐसा ग्रहीय दोष है जो तब उत्पन्न होता है जब कुंडली के सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच फंसे हुए हों। इस स्थिति में ग्रहों की स्थिति एक सर्प जैसी आकृति बनाती है, जिसे कालसर्प योग कहा जाता है।

कालसर्प दोष के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की बाधाएं आती हैं — करियर में रुकावट, आर्थिक संकट, स्वास्थ्य समस्याएं, वैवाहिक कलह और मानसिक तनाव। यह दोष व्यक्ति के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इस दोष का एकमात्र रामबाण उपाय है उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा पूरी विधि और नियमों के साथ सम्पन्न करना।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का विशेष महत्व क्या है?

  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कृपा: उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर का ज्योतिर्लिंग स्थित है, जो समय के स्वामी माने जाते हैं। महाकाल की कृपा से कालसर्प दोष के प्रभाव तुरंत शांत हो जाते हैं।
  • शिप्रा नदी — मोक्षदायिनी: शिप्रा नदी के तट पर कालसर्प दोष पूजा करने से पितृ ऋण और पूर्वजों के अधूरे कर्म भी पूर्ण होते हैं। यही कारण है कि उज्जैन को मोक्षदायिनी नगरी कहा जाता है।
  • राहु-केतु की शक्तिशाली उपस्थिति: उज्जैन में राहु मंदिर और शिव मंदिर दोनों की उपस्थिति के कारण राहु-केतु की ऊर्जाएं अत्यधिक सक्रिय रहती हैं, जिससे पूजा का प्रभाव तत्काल दिखाई देता है।
  • नौ प्रकार के सर्पों का आशीर्वाद: उज्जैन में कालसर्प शांति करने से 9 विभिन्न प्रकार के सांपों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कालसर्प शांति पूजा के साथ राहु और केतु पूजा सफलता के द्वार खोलती है।

जुलाई 2026 में कालसर्प दोष पूजा मुहूर्त और तिथियां कौन-सी है?

जुलाई 2026 के शुभ दिन

जुलाई 2026 में उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा के लिए निम्नलिखित तिथियां विशेष रूप से शुभ मानी गई हैं:

तिथिदिनविशेषता
1 जुलाईबुधवारसामान्य शुभ मुहूर्त
2 जुलाईगुरुवारसामान्य शुभ मुहूर्त
4 जुलाईशनिवारसामान्य शुभ मुहूर्त
5 जुलाईरविवारसामान्य शुभ मुहूर्त
6 जुलाईसोमवारश्रावण मास प्रारंभ — अत्यंत शुभ
11 जुलाईशनिवारसामान्य शुभ मुहूर्त
13 जुलाईसोमवारश्रावण सोमवार — सर्वोत्तम मुहूर्त
14 जुलाईमंगलवारसामान्य शुभ मुहूर्त
18 जुलाईशनिवारसामान्य शुभ मुहूर्त
19 जुलाईरविवारसामान्य शुभ मुहूर्त
20 जुलाईसोमवारश्रावण सोमवार — सर्वोत्तम मुहूर्त
25 जुलाईशनिवारसामान्य शुभ मुहूर्त
27 जुलाईसोमवारश्रावण सोमवार — सर्वोत्तम मुहूर्त
29 जुलाईबुधवारसामान्य शुभ मुहूर्त

जुलाई 2026 में पूजा के सर्वश्रेष्ठ दिन कौन-से है?

श्रावण सोमवार (13, 20, 27 जुलाई 2026)

जुलाई 2026 में 13, 20 और 27 जुलाई को श्रावण सोमवार पड़ रहे हैं। ये दिन कालसर्प दोष पूजा के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त माने जाते हैं। भगवान शिव को समर्पित सोमवार और श्रावण मास का संयोग पूजा को अत्यंत फलदायी बनाता है।

रविवार (5, 19 जुलाई 2026)

रविवार भगवान सूर्य को समर्पित दिन है। इस दिन कालसर्प पूजा करने से राहु-केतु के प्रभाव में शीघ्रता से कमी आती है।

अमावस्या से पूर्व तिथियां

जुलाई 2026 में अमावस्या 14 अगस्त को है, लेकिन इससे पूर्व की तिथियां भी पूजा के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

प्रतिदिन के शुभ मुहूर्त कौन-से है?

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा के लिए प्रतिदिन के कुछ विशेष मुहूर्त हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त — प्रातःकाल लगभग 4:00 से 6:00 बजे तक सर्वोत्तम माना गया है। इस समय महाकाल की भस्मारती भी होती है, अतः इसके बाद पूजा आरंभ करना अत्यंत शुभ है।
  • प्रातःकाल — सुबह 6:00 से 9:00 बजे तक का समय भी अत्यंत फलदायी है।
  • प्रदोष काल — सायंकाल लगभग 4:30 से 7:00 बजे तक शिव पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है।
  • राहु काल — इस समय पूजा नहीं करानी चाहिए। अतः पूजा से पूर्व ज्योतिषाचार्य से राहु काल का निर्धारण अवश्य करा लें।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा की विधि क्या है? कैसे की जाती है ये पूजा

  1. ज्योतिषीय परामर्श: सबसे पहले एक अनुभवी ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाएं और कालसर्प दोष की पुष्टि करवाएं। उज्जैन में पंडित जी को अपनी लग्न कुंडली भेजकर सर्वोत्तम मुहूर्त निर्धारित करवाएं।
  2. पूजा की बुकिंग: पंडित जी से एक दिन पहले संपर्क करके पूजा की बुकिंग अवश्य करवाएं।
  3. पवित्र स्नान: पूजा से पहले विधिवत स्नान करें।
  1. व्रत रखना: पूजा के दिन व्रत रखने से आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।
  2. वस्त्र: पुरुषों के लिए धोती, गमछा या कुर्ता-पायजामा और महिलाओं के लिए साड़ी या पंजाबी ड्रेस उपयुक्त मानी जाती है। काले और हरे रंग के वस्त्र पहनने से बचें।

विस्तृत पूजा विधि

  • गणेश पूजा और संकल्प पंडित जी द्वारा सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा की जाती है ताकि सभी बाधाएं दूर हों। इसके बाद संकल्प लिया जाता है कि यह पूजा कालसर्प दोष निवारण हेतु की जा रही है।
  • कलश स्थापना पंचामृत से शुद्ध किए गए कलश में पवित्र जल भरकर उस पर नारियल रखकर स्थापना की जाती है।
  • राहु-केतु मंत्रोच्चार निम्नलिखित मंत्रों का जाप किया जाता है:
    • ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
    • ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
    • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • नाग देवता अभिषेक भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग पर कच्चे दूध, गंगाजल, बिल्व पत्र, फूल और धतूरे से अभिषेक किया जाता है। सर्प देवताओं को दूध और चावल का भोग लगाया जाता है।
  • हवन और आहुति पवित्र अग्नि में घी, तिल, चावल और अन्य सामग्री की आहुति दी जाती है। राहु-केतु मंत्रों का उच्चारण करते हुए यज्ञ संपन्न किया जाता है।
  • आरती और प्रसाद वितरण पूजा के अंत में भगवान शिव और नाग देवताओं की आरती की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है।

पूजा अवधि

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा लगभग 1 से 3 घंटे तक चलती है। पूजा स्थल रामघाट, उज्जैन होता है।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान कौन-कौन से है?

  • महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन : बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम, भगवान महाकालेश्वर का मंदिर उज्जैन का सबसे पवित्र स्थल है। यहाँ कालसर्प पूजा करने से अधिकतम लाभ मिलता है।
  • रामघाट, शिप्रा नदी: उज्जैन में रामघाट शिप्रा नदी के तट पर स्थित है और यहाँ कालसर्प दोष पूजा का मुख्य स्थल माना जाता है। यहाँ पूरी विधि के साथ पूजा सम्पन्न कराई जाती है।
  • सिद्धवट आश्रम उज्जैन: उज्जैन में यह आश्रम क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित है जहां पूरी श्रद्धा और भावना के साथ अनुभवी पंडितो द्वारा पूजा सम्पन्न कराई जाती है।
  • अंगारेश्वर मंदिर उज्जैन: कालसर्प दोष पूजा के लिए अंगारेश्वर मंदिर भी अत्यधिक प्रसिद्ध है, यह मंदिर नदी किनारे स्थित है।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा के प्रमुख लाभ कौन-कौन से है?

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • लक्ष्मीजी की कृपा: नाग की सोने की मूर्ति की पूजा करने से देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • करियर में सफलता: नौकरी और व्यवसाय में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
  • आर्थिक स्थिरता: धन संबंधी समस्याओं में सुधार होता है।
  • वैवाहिक सुख: दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और विवाह में आ रही देरी दूर होती है।
  • स्वास्थ्य लाभ: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • मानसिक शांति: चिंता, भय और असुरक्षा की भावना समाप्त होती है।
  • पारिवारिक सामंजस्य: घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • नकारात्मक प्रभावों का निवारण: राहु-केतु के दुष्प्रभावों में तत्काल कमी आती है।

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