कालसर्प दोष पूजा मुहूर्त 2026

कालसर्प दोष पूजा मुहूर्त 2026: जाने पूजा का सबसे अच्छा दिन?

कालसर्प दोष शांति पूजा तभी सबसे प्रभावी मानी जाती है जब उसे शुभ दिन और शुभ मुहूर्त पर करायें। 2026 में कुछ ऐसे विशेष दिन आते हैं जब यह पूजा करने से दोष का प्रभाव जल्द और गहरा शांत होने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। ज्योतिष में समय का बहुत महत्व होता है और पूजा के समय का चयन भी उसी के अनुसार किया जाता है।

कालसर्प दोष शांति पूजा के लिए सबसे अच्छा समय वही है जब अमावस्या, नाग पंचमी, श्रवण सोमवार या महाशिवरात्रि जैसे दिन आते हैं। इन दिनों उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा करने से दोष के उग्र प्रभावों को शांत करने की संभावना बढ़ जाती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की ऊर्जा आती है।

2026 में उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा के सबसे शुभ दिन कौन-कौन से है?

नीचे वर्ष 2026 में वे मुख्य दिन दिए गए हैं जिन पर कालसर्प दोष पूजा उज्जैन में करने का विशेष महत्व माना जाता है। यदि आप सफलता पूर्वक पूजा कराना चाहते है तो नीचे दिये गए मुहूर्त में पूजा अवश्य कराएँ, अधिक जानकारी के लिए उज्जैन के योग्य पंडित जी से संपर्क करें। पूजा के लिए विशेष दिन निम्नानुसार है:

नाग पंचमी के दिन (18 अगस्त 2026)

18 अगस्त 2026 नाग पंचमी का दिन है। नाग देवताओं का यह पर्व विशेष रूप से कालसर्प दोष निवारण पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन सर्प देवता प्रसन्न होते हैं और पूजा का फल तुरंत मिलता है।

श्रवण के सोमवार (जुलाई-अगस्त 2026)

श्रवण माह के सोमवार विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना और दोष शांति पूजा के लिए अनुकूल होते हैं। भगवान शिव की कृपा से दोष जल्दी खत्म होता है।

  • 13 जुलाई 2026
  • 20 जुलाई 2026
  • 27 जुलाई 2026

महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026)

15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि है, जो भगवान शिव के लिए अत्यंत शुभ दिन है और कालसर्प दोष जैसे जटिल दोषों के समाधान में लाभकारी माना जाता है।

अमावस्या (New Moon Days)

अमावस्या तिथि कालसर्प दोष पूजा के लिए सर्वाधिक शुभ मानी जाती है। यह दिन ग्रहों की ऊर्जा को शांत और संतुलित करने में मदद करता है।

  • 18 जनवरी 2026
  • 19 मार्च 2026
  • 17 अप्रैल 2026
  • 16 मई 2026
  • 14 अगस्त 2026
  • 12 अक्टूबर 2026
  • 11 नवंबर 2026
  • 10 दिसंबर 2026

पितृ पक्ष अमावस्या (Pitru Paksha Amavasya)

सितंबर 2026 की यह अमावस्या पारिवारिक और पूर्वजों के शांति के लिए प्रभावशाली है और कालसर्प दोष से जुड़ी समस्याओं पर रिहाई पाने के लिए अच्छा अवसर देती है।

कालसर्प दोष पूजा मुहूर्त की विशेषताएँ क्या है?

कहा जाता है कि सिर्फ दिन ही नहीं, बल्कि समय यानी म्हूर्त भी पूजा के असर को गहरा करता है। ज्योतिष अनुभव के अनुसार:

  • सुबह के ब्रह्म मुहूर्त (लगभग 4 बजे से 6 बजे तक) में पूजा करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
  • अगर सुबह संभव न हो, तो मध्याह्न का अभिजित मुहूर्त भी शुभ है।
  • पूजा के समय राहु काल से बचना चाहिए क्योंकि यह समय ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव बढ़ाता है।

क्यों ये दिन कालसर्प पूजा के लिए सबसे असरदार माने जाते हैं?

2026 में ऊपर बताए गए दिन:

  • अमावस्या ऊर्जा को शांत और ग्रहों को स्थिर करने का समय है, यही कारण है कि यह कालसर्प दोष पूजा का श्रेष्ठ दिन माना जाता है।
  • नाग पंचमी साँप (नाग) देवताओं को समर्पित है, और कारण है कि राहु–केतु से जुड़ी नकारात्मकता में राहत मिलती है।
  • श्रवण सोमवार शिवजी की कृपा और शांति दोनों देते हैं।
  • महाशिवरात्रि शिवजी का वह दिन है जब भक्ति और ऊर्जा का संयोग व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक शांति देता है।

कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने के उपाय कौन-से है?

सिर्फ पूजा ही नहीं, कुछ नियमित उपाय भी इसके प्रभाव को हल्का करने में मदद करते हैं।

  • भगवान शिव की नियमित पूजा
  • राहु–केतु के मंत्रों का जाप
  • दान और सेवा
  • नाग पूजा और नाग पंचमी

कालसर्प पूजा कराना कब और कैसे लाभकारी होती है?

अगर आप चाहें कि कालसर्प दोष पूजा का प्रभाव जल्दी और लंबे समय तक दिखे, तो:

  • उज्जैन जैसे शक्तिपीठ पर व्रत या पूजा करायें (यहाँ ऐतिहासिक प्रभाव के कारण पूजा अधिक फलदायक मानी जाती है)।
  • हमेशा शुभ मुहूर्त के अनुसार पूजा का समय निर्धारित करें।
  • व्यक्ति अपनी जन्म कुंडली के अनुसार वैदिक पंडित से विशेष मुहूर्त निर्धारित करवा सकता है ताकि निश्चित ग्रह संयोग के अनुसार और भी अच्छा फल मिले।

उज्जैन में मंगल दोष पूजा कैसे कराएं?

अगर आप अपनी जन्मकुंडली के अनुसार सबसे सही मुहूर्त में पूजा करना चाहते हैं, तो उज्जैन के अनुभवी ज्योतिषी से संपर्क करें और पूजा के बारें में पूरी जानकारी प्राप्त करें। पंडित सुरेश शर्मा जी को पूजा अनुष्ठान का 15 वर्षो से अधिक अनुभव प्राप्त है आज ही नीचे दिये गए नंबर पर कॉल करें और पूजा बुक करें।

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