उज्जैन मंगल दोष भात पूजा | Mangal Dosh Bhat Puja Ujjain
क्या आपकी शादी में अकारण देरी हो रही है? क्या विवाह के बाद जीवनसाथी के साथ अनबन बनी रहती है या रक्त संबंधी कोई बीमारी आपको परेशान कर रही है? ज्योतिष शास्त्र में इन सभी समस्याओं का मुख्य कारण ‘मंगल दोष’ (Mangal Dosh) को माना जाता है।
- कोई बुकिंग शुल्क नहीं
- कोई सामाग्री की नहीं लाना है
- जाप के बाद कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं
मंगल दोष क्या है? (What is Mangal Dosh?)
जब किसी व्यक्ति की कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल स्थित होता है, तो उसे ‘मांगलिक’ कहा जाता है। इसे ही मंगल दोष या कुब्जा दोष भी कहते हैं। मंगल के उग्र स्वभाव के कारण जातक के जीवन में क्रोध, विवाह में बाधा और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
मंगल भात पूजा क्या है?
मंगल भात पूजा एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है, जिसमें पितरों की शांति के लिए भात (चावल) का अर्पण किया जाता है।
यह पूजा उन आत्माओं की शांति के लिए की जाती है, जिनकी मृत्यु अकाल हुई हो, जिनका अंतिम संस्कार विधि पूर्वक न हुआ हो या जिनके श्राद्ध कर्म अधूरे रह गए हों।
शास्त्रों में बताया गया है कि जब पितृ संतुष्ट नहीं होते, तो वंश में अनेक प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होती हैं। मंगल भात पूजा के माध्यम से पितरों को तृप्त कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
उज्जैन में ही क्यों होती है भात पूजा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह का जन्म स्थान है। यहाँ की मिट्टी (लाल रेत) और वातावरण में मंगल की विशेष ऊर्जा समाहित है। पूरी दुनिया में केवल यही एक ऐसा स्थान है जहाँ मंगल देव की ‘भात पूजा’ (चावल से पूजा) की जाती है।
वैज्ञानिक तथ्य: उज्जैन से कर्क रेखा गुजरती है, और खगोलीय दृष्टि से मंगल ग्रह और इस स्थान का सीधा संबंध माना गया है।
भात पूजा की पूरी विधि (Bhat Puja Procedure)
उज्जैन में भात पूजा अत्यंत वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तरीके से की जाती है। इसमें मुख्य रूप से पके हुए चावलों का उपयोग किया जाता है।
गणेश पूजन और संकल्प: सबसे पहले भगवान गणेश और माता पार्वती का पूजन कर पूजा का संकल्प लिया जाता है।
अभिषेक: मंगल देव (शिव रूपी लिंग) का पंचामृत अभिषेक किया जाता है।
भात लेपन (मुख्य प्रक्रिया): भगवान मंगलनाथ पर ठंडे पके हुए चावलों (भात) का लेपन किया जाता है। मंगल ग्रह का स्वभाव ‘उग्र’ और ‘गर्म’ माना गया है, और चावल की प्रकृति ‘ठंडी’ होती है। चावल का लेपन करने से मंगल देव शांत होते हैं।
श्रृंगार: भात के ऊपर दही, फूल और चंदन से सुंदर श्रृंगार किया जाता है।
आरती और दान: अंत में आरती की जाती है और मंगल से संबंधित वस्तुएं (मसूर की दाल, लाल कपड़ा, गुड़) दान की जाती हैं।
भात पूजा के लाभ (Benefits of Bhat Puja)
- विवाह बाधा दूर होना: जिन जातकों का विवाह नहीं हो पा रहा, उनके लिए यह पूजा रामबाण है।
- दांपत्य सुख: पति-पत्नी के बीच तनाव खत्म होता है और आपसी तालमेल बढ़ता है
- कर्ज से मुक्ति: मंगल ग्रह भूमि और संपत्ति का कारक है, अतः इस पूजा से कर्ज और कानूनी विवादों में राहत मिलती है
- स्वास्थ्य: रक्त विकार और ऊर्जा की कमी दूर होती है।
मंगल भात पूजा के लिए शुभ दिन और मुहूर्त
वैसे तो उज्जैन में प्रतिदिन भात पूजा होती है, लेकिन निम्नलिखित समय पर इसका प्रभाव दोगुना हो जाता है:
मंगलवार (Tuesday): मंगल देव का अपना दिन।
भाद्रपद मास: मंगल पूजा के लिए विशेष महीना।
अंगारक चतुर्थी: जब मंगलवार के दिन चतुर्थी तिथि पड़े।
विशेष योग: जब कुंडली में मंगल भारी हो या ‘मंगल की महादशा’ चल रही हो।
मंगल भात पूजा में लगने वाला खर्च
उज्जैन में मंगल भात पूजा का खर्च पूजा की विधि, सामग्री और आचार्य के अनुभव पर निर्भर करता है। सामान्यतः इसका खर्च मध्यम स्तर का होता है और इसमें पूजा सामग्री, मंत्र जाप और हवन शामिल होते हैं। सटीक जानकारी के लिए पूजा बुकिंग से पहले विवरण लेना उचित रहता है।
मंगल भात पूजा की बुकिंग कैसे करें?
पहले अपनी समस्या और पूजा का उद्देश्य स्पष्ट करें
अपनी जन्म जानकारी साझा करें
शुभ तिथि और मुहूर्त तय करें
पूजा की विधि और खर्च की पुष्टि करें
निर्धारित दिन उज्जैन पहुंचकर पूजा संपन्न कराएं
समय: भात पूजा आमतौर पर सुबह 6:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे के बीच होती है।
बुकिंग: मंगलनाथ मंदिर में पूजा के लिए पहले से रसीद कटवानी होती है या आप किसी विश्वसनीय पंडित जी से संपर्क कर सकते हैं।
उज्जैन मे मंगल दोष भात पूजा के लिए संपर्क करे
पंडित सुरेश शर्मा जी द्वारा उज्जैन मे मंगल दोष भात पूजा कराने हेतु वर्ष भर लोग आते है और अपनी परेशानियों से मुक्ति पाते है, आप भी अगर किसी दोष से परेशान है और उससे पूरी तरह निवारण हेतु उज्जैन मे पूजा करवाना चाहते है तो अभी पंडित जी से बात करे और निशुल्क परामर्श ले।