जून 2026 में कालसर्प दोष पूजा कब कराएं? जाने मुहूर्त और तिथि
क्या आपके जीवन में रुकावटें आ रही हैं? हर काम आखिरी मौके पर टूट जाता है? शादी में देरी, करियर में ठहराव, या अनजान डर? हो सकता है यह कालसर्प दोष हो। अगर आप इस दोष से छुटकारा चाहते है तो जून 2026 इससे मुक्ति पाने का सबसे शक्तिशाली महीना है। जून मे कालसर्प दोष निवारण पूजा सम्पन्न कराएँ और इस दोष का समाधान पाएँ।
जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी सात ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) राहु और केतु के बीच फंसे हों, तो यह योग बनता है। राहु और केतु छाया ग्रह हैं – ये वास्तविक ग्रह नहीं, बल्कि ग्रहण बिंदु हैं।
राहु = सूर्य और चंद्रमा का छाया बिंदु (स्वार्थ, भ्रम)
केतु = आत्मा, मोक्ष, पिछले जन्मों का फल
जब ये दोनों बाकी सभी ग्रहों को अपने बीच में फसा लेते हैं, तो व्यक्ति की ऊर्जा फंस जाती है। यही कालसर्प योग या कालसर्पदोष कहलाता है।
जून 2026 में उज्जैन में की गई कालसर्प दोष पूजा आपके जीवन को बदलने का सुनहरा अवसर है। यह महीना 18 साल बाद आ रहा है इस तरह का शुभ संयोग। तो इस महीने उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा अवश्य कराएँ और विशेष लाभ प्राप्त करें।
Contents
- 1 जून 2026 में कालसर्प दोष पूजा क्यों है विशेष?
- 2 जून 2026 में पूजा के विशेष योग क्या है?
- 3 कालसर्प दोष पूजा जून 2026 में ही क्यों कराएं?
- 4 जून 2026 कालसर्प दोष पूजा की श्रेष्ठ तिथियां कौन-सी है?
- 5 उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का दिन प्रतिदिन मुहूर्त विवरण
- 6 जून 2026 में सबसे अच्छी तिथि कौन सी है?
- 7 कालसर्प दोष पूजा की संपूर्ण विधि क्या है?
- 8 उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का खर्च कितना आता है?
- 9 कालसर्प दोष पूजा से मिलने वाले लाभ कौन-कौन से है?
- 10 क्या कालसर्प दोष पूजा के बाद राहु-केतु शांत हो जाते हैं?
- 11 कालसर्प पूजा के बाद कितने दिनों तक नियम पालन करें?
- 12 उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग के लिए संपर्क कैसे करें?
जून 2026 में कालसर्प दोष पूजा क्यों है विशेष?
ग्रहों की अद्भुत स्थिति
जून 2026 में ग्रहों की स्थिति ऐसी बनेगी जो 18 साल बाद आती है:
| ग्रह | राशि | स्थिति | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| राहु | मीन | उच्च का | जल तत्व प्रबल – भावनात्मक शांति |
| केतु | कन्या | मूल त्रिकोण | पृथ्वी तत्व – स्थिरता |
| गुरु | कर्क | मित्र राशि | शुभ प्रभाव बढ़ेगा |
| शनि | मीन | राहु के साथ | अतिरिक्त शक्ति लेकिन सावधानी जरूरी |
| चंद्रमा | वृषभ-मिथुन | पूर्णिमा पर पूर्ण | मन की शांति के लिए उत्तम |
जून 2026 में पूजा के विशेष योग क्या है?
5 जून – सर्वार्थ सिद्धि योग + शुक्ल पक्ष पंचमी
12 जून – अमृत सिद्धि योग + गुरु पुष्यामृत योग
19 जून – पूर्णिमा + चंद्र ग्रहण योग (यदि हो)
21 जून – ग्रहण परिहार योग
26 जून – शनि प्रदोष + कृष्ण पक्ष अमावस्या
कालसर्प दोष पूजा जून 2026 में ही क्यों कराएं?
जून 2026 में विशेष ग्रह योग बन रहे हैं:
- राहु-केतु की स्थिति अनुकूल
- पूर्णिमा पर चंद्रमा पूर्ण बल में
- गुरु की दृष्टि शुभ
- मानसून का प्रारंभ – प्रकृति का आशीर्वाद
इस महीने उज्जैन मे कालसर्प पूजा का फल सामान्य से 27 गुना अधिक मिलता है।
जून 2026 कालसर्प दोष पूजा की श्रेष्ठ तिथियां कौन-सी है?
श्रेष्ठ तिथियां और समय
| तिथि | वार | शुभ मुहूर्त | अभिजित मुहूर्त | विशेष योग | फल |
|---|---|---|---|---|---|
| 5 जून 2026 | शुक्रवार | प्रातः 5:15 – 7:30 | 11:45 – 12:30 | सर्वार्थ सिद्धि योग | नए कार्यारंभ के लिए उत्तम |
| 12 जून 2026 | शुक्रवार | प्रातः 5:10 – 7:15 | 11:40 – 12:25 | अमृत सिद्धि योग | स्वास्थ्य लाभ के लिए |
| 19 जून 2026 | शुक्रवार | प्रातः 4:58 – 6:45 | 11:38 – 12:22 | पूर्णिमा + गुरु पुष्यामृत | सर्वश्रेष्ठ – सभी दोष निवारण |
| 21 जून 2026 | रविवार | प्रातः 5:00 – 6:30 | 11:35 – 12:20 | ग्रहण योग (यदि लागू) | पितृ दोष निवारण |
| 26 जून 2026 | शुक्रवार | रात्रि 7:00 – 8:30 | दोपहर 12:00 – 12:45 | शनि प्रदोष व्रत | कर्म दोष निवारण |
उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का दिन प्रतिदिन मुहूर्त विवरण
5 जून 2026 – नाग पंचमी पूर्व विधि
सूर्योदय: 5:15 AM
चंद्रोदय: 8:45 PM
शुभ चौघड़िया:
– प्रातः 5:15 – 6:45 (लाभ)
– प्रातः 9:15 – 10:45 (शुभ)
– दोपहर 12:15 – 1:45 (चर)
विशेष: इस दिन नाग देवता की पूजा करने से भविष्य में होने वाले सर्प दोष भी टल जाते हैं।
19 जून 2026 – पूर्णिमा विशेष (सर्वश्रेष्ठ)
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 18 जून रात्रि 11:23 PM
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 19 जून रात्रि 9:45 PM
- नाग पूजा का सर्वोत्तम समय: प्रातः 5:00 – 6:30
- हवन समय: दोपहर 12:00 – 1:00
विशेष: इस दिन चंद्रमा पूर्ण बल में होगा। कालसर्प दोष मुख्य रूप से चंद्रमा और राहु-केतु से जुड़ा है, इसलिए इस दिन पूजा का प्रभाव सामान्य दिनों से 27 गुना अधिक होगा।
जून 2026 में सबसे अच्छी तिथि कौन सी है?
19 जून 2026 (पूर्णिमा) – यह दिन सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि:
- पूर्णिमा तिथि
- गुरु पुष्यामृत योग
- चंद्रमा पूर्ण बल में
- अभिजित मुहूर्त में पूजा का विशेष फल।
कालसर्प दोष पूजा की संपूर्ण विधि क्या है?
- तांबे के कलश में जल भरें
- पंचपल्लव (पीपल, बरगद, आम, पाकड़, बेल) डालें
- सुपारी, दूर्वा, अक्षत, सिक्का डालें
- कलश पर नारियल रखें
- कलश के नीचे धान रखें
- कलश को लाल कपड़े से लपेटें।
विशेष विधि:
- राहु यंत्र पर नीले फूल चढ़ाएं
- केतु यंत्र पर धतूरे के फूल चढ़ाएं
- दोनों यंत्रों पर तेल का दीया जलाएं
उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का खर्च कितना आता है?
कालसर्प दोष पूजा का खर्च कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे:
- पूजा किस स्थान पर कराई जा रही है
- कितने पंडित पूजा करवा रहे हैं
- पूजा सामान्य है या विशेष अनुष्ठान
- हवन, रुद्राभिषेक या अतिरिक्त जाप शामिल हैं या नहीं
- पूजा सामग्री और व्यवस्था कैसी है
सामान्यतः पूजा का खर्च ₹2,100 से ₹5,000 या उससे अधिक तक हो सकता है। विशेष अनुष्ठान, विस्तृत हवन या बड़े स्तर की पूजा में खर्च अलग हो सकता है। यदि पूजा Ujjain जैसे पवित्र स्थान पर कराई जाती है, तो वहाँ पूजा पैकेज और व्यवस्था के अनुसार शुल्क अलग-अलग हो सकता है। पूजा शुल्क की सटीक और अधिक जानकारी के लिए पंडित जी से संपर्क करें।
कालसर्प दोष पूजा से मिलने वाले लाभ कौन-कौन से है?
श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से निम्न लाभ माने जाते हैं:
- जीवन की बाधाओं में कमी
- मानसिक शांति
- करियर और व्यापार में सुधार
- आर्थिक स्थिति में सुधार
- विवाह में आ रही देरी दूर होना
- पारिवारिक सुख
- आध्यात्मिक उन्नति।
क्या कालसर्प दोष पूजा के बाद राहु-केतु शांत हो जाते हैं?
कालसर्प दोष पूजा से दोष का प्रभाव कम होता है, लेकिन पूरी तरह शांति के लिए:
- नियमित साधना जरूरी
- अच्छे कर्म करें
- मंत्र जाप जारी रखें
- सात्विक जीवनशैली अपनाएं।
कालसर्प पूजा के बाद कितने दिनों तक नियम पालन करें?
कालसर्प पूजा के बाद कम से कम 41 दिन (एक मंडल) तक नियमो का पालन करना चाहिए। पूर्ण लाभ के लिए 90 दिन (तीन मंडल) तक नियमित मंत्र जाप और सात्विक जीवनशैली अपनाएं।
उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग के लिए संपर्क कैसे करें?
यदि आप कालसर्प दोष पूजा उज्जैन में विधि-विधान से करवाना चाहते हैं, तो पहले अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाएं और शुभ मुहूर्त निर्धारित करें। अनुभवी वैदिक पंडित द्वारा सही विधान से सम्पन्न पूजा अधिक फलदायी मानी जाती है।
बुकिंग के लिए संपर्क करें:
पंडित सुरेश शर्मा जी